वर्षी तप पारण –

मई 14, 2021, शुक्रवार

जैन समाज आखातीज पर गन्ने के रस से करवाता है वर्षीतप का पारणा

जैन समाज के आराध्य देव भगवान आदिनाथ को भिक्षा में करीब 13 माह बाद गन्ने का रस मिला था। तभी से जैन समाज वर्षीतप का पारणा गन्ने के रस से करता आ रहा है। यह पंरपरा बाबा आदम के जमाने से चली आ रही है। जिसमें वर्षीतप करने वालों का पारणा सबसे पहले केवल गन्ने के रस से किया जाता है। चूकि भगवान आदिनाथ को आखातीज के दिन ही गन्ने का रस मिला था, इस कारण बरसों से यह पंरपरा आखातीज के दिन की जाती है। इस दिन वर्षीतप करने वाले को केवल गन्ने का रस ही पिलाया जाता है।

जैन समाज में आखातीज का विशेष महत्व यूं तो आखातीज देशभर में मनाई जाती है। इस दिन शादी ब्याह का अबूझ मुहूर्त होने के कारण इस दिन सैंकड़ों लोग जिनके मुहूर्त नहीं निकल पाते हैं वे भी इसदिन शादी ब्याह रचाते हैं। लेकिन जैन समाज में आखातीज का विशेष महत्व होता है।

13 माह बाद आखातीज के दिन मिला था गन्ने का रस जैन समाज के पहले तीर्थंकर भगवान आदिनाथ(ऋषभ देव) भगवान ने जगह जगह भिक्षा मांगी थी। लेकिन उन्हें 13 माह तक कहीं कुछ भी नहीं मिला था। उन्हें 13 माह बाद उन्हीं के सुपौत्र श्रेयांस कुमार द्वारा गन्ने का रस पिलाया गया। बस तभी से जैन समाज में वर्षीतप की परंपरा शुरू हो गई। जिसे हजारों साल हो चुके हैं। सालभर करते हैं एक दिन छोड़कर एक दिन व्रत जैन समाजजनों द्वारा पूरे 13 माह तक एक दिन छोड़कर एक दिन व्रत किया जाता है। इस तपस्या को वर्षीतप कहा जाता है। इसमें एक दिन बिल्कुल कुछ नहीं खाया जाता है। वहीं एक दिन केवल दो समय सुबह सुर्योदय के बाद और शाम को सुर्योअस्त के पहल खाते हैं। इस प्रकार पूरे 13 माह व्रत करने के बाद वर्षीतप का पारणा आखातीज के दिन होता है। जिसमें केवल गन्ने के रस तपस्या करने वाले को पिलाया जाता है। भगवान आदिनाथ को भी गन्ने के रस का ही भोग लगाया जाता है। गत वर्ष नीमच में सामुहिक वर्षीतप के पारणे का आयोजन किया गया था। जिसमें करीब 187 लोगों ने तप किया था।

जैन समाज का सबसे बड़ा तप है, चैत्र माह से होता है शुरू वर्षीतप की शुरूआत चैत्र माह में हो जाती है। जिसको भी यह व्रत करना होता है चैत्र माह से एक दिन छोड़कर एक दिन करने लगता है। ताकि आखातीज के दिन पूरे 13 माह पूर्ण हो जाएं। यह जैन समाज का सबसे बड़ा तप कहलाता है। क्योंकि इसमें करीब 6 माह से अधिक का व्रत हो जाता है। कुछ समाजजन वर्षीतप का पारणा पालीताणा तीर्थ गुजरात और हस्तिनापुर उत्तरप्रदेश भी जाकर करते हैं। वहीं कुछ स्थानीय स्तर पर करते हैं। भगवान आदिनाथ को 13 माह तक भिक्षा के रूप में कुछ नहीं मिला था। वहीं आखातीज के दिन उनके सुपौत्र श्रेयांस कुमार ने गन्ने का रस पिलाया था। तभी से समाजजनों द्वारा किए जाने वाले वर्षीतप का पारणा गन्ने के रस से किया जाता है। पिछले साल सामुहिक वर्षीतप का आयोजन किया गया था। आगे भी सामुहिक आयोजन करने की भावना है।

वर्षीतप के पारणा के लिए पालीताणा तीर्थ गुजरात और हस्तिनापुर उत्तरप्रदेश प्रमुख है। समाज में इसे बहुत ही कठोर तप माना जाता है, तथा तप करने वाले तपस्वियों की अनुमोदना पूरा समाज वर्षभर करता है।