Children Story in Hindi – नन्हा मुर्गा – सुनहरी कलगी – Hen and Golden Kalgi

children story in hindi

नन्हा मुर्गा – सुनहरी कलगी

एक समय की बात है । एक जंगल में एक घर था । उस घर में एक बिल्ली , एक चिड़िया और एक छोटा मुर्गा रहता था । उसी जंगल में एक चालाक लोमड़ी भी रहती थी । चिड़ियाँ और बिल्ली रोज दूर जंगल में लकड़ी बीनने जाते और नन्हें मुर्गे को घर में छोड़ जाते थे । जाने के पहले वे नन्हें मुर्गे को अच्छी तरह समझा कर कहते थे – “देखो , हम बहुत दूर जा रहे हैं , तुम यहीं रह कर घर की रखवाली करो । लेकिन आवाज मत करना और यदि लोमड़ी आये तो बाहर भी मत झाँकना । ”
एक दिन जब लोमड़ी ने देखा कि चिड़िया चिड़ियाऔर बिल्ली जंगल जा चुके हैं , तो धीरे – धीरे उस घर के निकट आ कर गाना गाने लगी –
“नन्हा मुर्गा ,
सुंदर कलगी,
कलगी तेरी लाल
लालौर चिकने तेरे बाल ।
निकल जरा बाहर तो भैया
दूँगी तुझको मटर के दाने ।”

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नन्हें मुर्गे ने जैसे हीं गाना सुन कर खिड़की से झाँका की लोमड़ी ने उसे धर दबोचा और लेकर चल पड़ी अपने माँद में ।
अब नन्हा मुर्गा बेचारा चिल्लाया –
“ लोमड़ी आयी , लोमड़ी आयी,
मुझे पकड़ के वो अब चली ।
गहरी नदियों के उस पार
ऊँचे ऊँचे पर्वत पार
बिल्ली आओ , चिड़िया आओ
मुझे बचाओ , मुझे छुड़ाओ ।”

बिल्ली और चिड़िया ने जब नन्हे मुर्गे की आवाज सुनी तो दौड़े – दौड़े आये और लोमड़ी के पीछे दौड़ कर उस नन्हें मुर्गे की जान बचायी ।
दूसरे दिन जब चिड़िया और बिल्ली जाने लगे तो नन्हें मुर्गे को समझाया कि हम दोनों बहुत दूर जा रहे हैं । तुम्हारे चिल्लाने की आवाज हम तक नहीं पहुँच पायेगी । इसलिये खिड़की से झाँकना मत और ना हीं शोर करना । ऐसा कहकर वे दोनों जंगल की ओर चल पड़े ।
अब जैसे ही लोमड़ी को मौका मिला वह उस घर के खिड़की के नीचे आ कर गाने लगी –
“नन्हा मुर्गा ,
सुंदर कलगी,
कलगी तेरी लाल
लालौर चिकने तेरे बाल ।
निकल जरा बाहर तो भैया
दूँगी तुझको मटर के दाने ।”
नन्हा मुर्गा चुपचाप बैठा रहा और न हीं खिड़की से बाहर देखा ।
अब लोमड़ी ने आगे गाना गाया
“लड़की लड़के दौड़ गये
पथ पर गेंहू छोड़ गये
मुर्गी आयी खाने को
नहीं मिलेगा मुर्गे को ! ”

अब तो नन्हा मुर्गा खिड़की से झाँक कर बोला,
“कूँकड़ूकूँ कूँकड़ूकूँ
लोमड़ी बताओ तो !
मुर्गी नहीं देगी क्युँ
अनाज मुझे खाने को ? ”
जैसे हीं मुर्गे ने खिड़की से झाँक कर बोला , लोमड़ी ने झट से उसे पकड़ लिया और चल पड़ी अपने माँद में । मुर्गा फिर जोर से चिल्लाया
“ लोमड़ी आयी , लोमड़ी आयी,
मुझे पकड़ के वो अब चली ।
गहरी नदियों के उस पार
ऊँचे ऊँचे पर्वत पार
बिल्ली आओ , चिड़िया आओ
मुझे बचाओ , मुझे छुड़ाओ ।”

लेकिन चिड़िया और बिल्ली बहुत दूर जा चुके थे । अब लोमड़ी नन्हें मुर्गे को अपने माँद में ले कर चली गयी । जब शाम ढ़लने पर चिड़िया और बिल्ली आये तो उन्हें नन्हा मुर्गा कहीं नहीं दिखाई दिया । बाहर जब खिड़की की पास देखा तो उन्हें लोमड़ी के पंजों के निशान दिखे । अब वे दोनों चल पड़े पंजे के निशाने के पीछे –पीछे और पहुँच गये , लोमड़ी के माँस के पास । लेकिन लोमड़ी तो अपने माँद में बैठी थी । अब बिल्ली सीटी बजा कर गाना गाने लगा –

“मीठी तान बजाऊँगा
गा गा तुझे रिझाऊँगा
गयी घूमने क्या बहना
या भाया घर में हीं रहना ।”
लोमड़ी ने जब गाना सुना तो बोली – “कौन है जो इतना सुरीला सीटी बजाकर गा रहा है ।चल कर देखना चाहिये ।”

ऐसा कहकर वह अपने माँद से बाहर निकली । जैसे हीं लोमड़ी बाहर आई , बिल्ली और चिड़िया उस पर झपट पड़े । दोनों ने उसकी जम कर पिटाई की । आखिर वह सिर पर पैर रख कर भाग खड़ी हुई ।उसके बाद चिड़िया और बिल्ली ने उस नन्हें मुर्गे को लोमड़ी के माँद से बाहर निकाला तथा तीनों खुशी –खुशी अपने घर की ओर लौट गये ।

॥ समाप्त ॥